| सदगुरू |
बुढ़े ये नहीं मानना चाहते कि वे बुढ़े हैं। और युवा खुद को युवा नहीं बल्कि हर काम करने लायक बड़ा मानते है। पर उनकी जगह किसी ओर ने ले ली है। ऐसा सिर्फ इंसान ही नहीं करतें। खासकर हाथियों में, आप देखेंगे की अचानक एक युवा हाथी गुस्से में यहां वहां घूमकर चीजें उखाड़ेगा। क्योंकि उसकी एक बड़ी हाथी से लड़़ाई हुई हैं। वो अपनी जगह नहीं छोंड़ रहा था। तो ये छोटा हाथी लड़ना चाहता था। पर लड़ने की ताकत नहीं थी। इसलिए तबाही मचा रहा हैं। जवानी, तो इसलिए हमने इस देश में वर्ण आश्रम धर्म बनाए थे।
युवा हाथी की तरह वो चाहते है कि आप जगह छोड़े पर वो कह नहीं सकते। आज कल आधुनिक युग में हम बच्चों को दूर भेज देते हैं। हम नहीं जाते हम उन्हें कहीं ओर भेज देते हैं। इन अजीब स्थानों को आम तौर पर यूनिर्वसिटी कहते हैं। पर उन दिनों जीवन खेती के आस- पास ही घूमता था। लोग घर छोड़कर दूर नहीं जा पाते थे। क्योंकि उनके जानवर और जमीन वही होती थी। वो कही और जाकर नहीं जी सकते थें। तो किसी को तो जाना था। तो 48 साल के माता पिता सन्यास ले लेते थे। और अलग दो स्थानों की ओर चले जाते थे। पति एक अलग आश्रम में जाता, और पत्नी अलग में।
अपनी आध्यत्मिक साधना के लिए 12 साल 60 की उम्र में वे वापस आकर फिर से शादी करते थें। आज कल वो बाहर नहीं जाते वे साथ ही रहते हैं। और 60 साल में फिर भी शादी करते हैं। नहीं, आपको बारह साल दूर रहना चाहिए। पहली शादी में शायद शरीर और मन की व्यवस्थिताए आप पर हावी थी। अब वो सब चीजें जा चुकी हैं। 12 साल के आध्यात्मिक साधना के बाद आप एक बिल्कुल अलग तरह के साथ वनप्रस्थ में चले जाते हैं। याने अपने जीवन का अन्तिम हिस्सा वन में जीते हैं। तो तब ऐसा होता था। जब आप चाहते थें, माता-पिता दूर हो जाये वाे हाेे जाते थे। अब वो नहीं जाते, वो चाहते है आप चले जाए।
अगर आपने दुनिया में सफलता पा ली हैं। तो आप उनके चाहने से पहले ही जाना चाहेंगे। पर अगर आप सफल नहीं हैं - तो टकराव। किसी कारण से अगर आप सफल नहीं हैंं। तो माता - पिता और बच्चों मेंं टकराव स्वभाविक हैं। आपको ये समझना चाहिए कि भावनाओं के कारण कोई खुद को माता-पिता या बच्चा मानता हैं। पर जीवन की स्थिति यही है, मानो एक जवान हाथी और बड़ा हाथी इस बात को लेकर लड़ रहे है की किसकी चलेगी। पुरूष एक तरह से लड़ते है, महिलाएं दूसरी तरह से। पर बुनियादी समस्या एक ही हैं आपको अपनी चलानी हैं। और वो आपको ऐसा करने नहीं दे रहेंं टकराव होते रहेंगे।
जो बच्चे दूर रहते हैं वो हमेशा आपको प्यार करते हैं। यही सही तरीका हैं। अगर वो आपके साथ होते......इसलिए नहीं के आप बुरे है या वो बुरे हैं, ये इसलिए हैंं क्योंकि आपको अपनी चलानी हैं और उन्हें अपनी। पर दोनो साथ रह रहें हैं। तो तनाव पैदा होगा। तनाव तब नहीं होगा जब आपके बच्चों में बड़प्पन आ जाए - आप समझे...... आपने उन्हें बचपन में परिपक्व बना दिया हैं। तो वे बुजुर्गों के साथ काफी अच्छे से रह पाएंगे। जब आप बिमार होते हैं, तब वो ठीक से बरताव करेंगे क्योंकि अब उनमें देखभाल करने की भावना आ जाती हैं। पर अगर आप तंदरूस्थ है और वो भी तो दूरी रखना बेहतर हैं। तो ये कोई नई समस्या नहीं हैं। मुझे विश्वास है, गुफाओं में रहने वाले जवान और बुजुर्ग लोंगों के बीच भी यही समस्या रही होगी। क्योंकि बुजुर्ग खुद को बुजुर्ग नहीं मानते और युवा खुद को युवा नहीं बल्कि हर काम करने लायक बढ़ा मानते हैं। तो कुछ न कुछ होता रहेगा। इसे कैसे संभाला जाएं तरीका ये है कि बुजुर्ग पीछे हटते जाएं और युवा उनकी जगह लेते जाएं।
बात सिर्फ ये है कि बुजुर्गो को बुद्धि और अनुभव देखाते रहना होगा ताकि युवा बुजुर्गों की कीमत समझ जाएंं। ऐसा नहीं हुआ तो युवा आपकी इज्जत नहीं करेंगे। और बुरा बर्ताव करेंगे। तो ये चीज आपको उम्र बढ़ने के साथ सीखनी होगी। आपमें जीवन की समझ और परख हैं जो उन्हें अभी नहीं है इसलिए वो आपका सम्मान करेंगे। तब आप एक ही स्थान में रह सकते हैं। फर्स्ट फ्लोर पे, समझदारी से आप उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर रहने दें और खुद फर्स्ट फ्लोर पर रहे, आपको सम्मान मिलेगा। अगर आपमें सम्मान लायक कुछ नहीं हैं। और आपने बस अपनी समस्याएं और बकवास जाहिर की हैं। तो वान-प्रस्थ आपके लिए ठीक हैं। मैं जानता हूं की आपको इस उत्तर की उम्मीद नहीं थींं। पर मैं क्या करुँ, मैं कोई नेता नहीं हूँ जो सही चीजें बोलू। मैं वहीं कहूँगा जो सच हैं।
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