अकेले भारतवर्ष में ही प्रतिवर्ष लगभग 20,000 व्‍यक्ति सर्पदंश का शिकार होते हैं। जिनमें से 15,000 की मृत्‍यु हो जाती है। सर्पदंश के शिकार लोग अधिकतर ग्रामीण, निर्माण कार्य में लगे मजदूर, खेत में काम करने वाले किसान या रात में बाहर खुले में सोने वाले लोग होते हैं। अधिकतर मामलों में शरीर के खुले भाग जैसे हाथ या पैर पर सांप द्वारा काटा जाता है। सर्पदंश के अधिकतर मामले मानसून के दिनों में सामने आते हैं क्‍योंकि वर्षा का पानी सांपों और उनके शिकार चूँहो के बिलों में घुस जाता है। सर्पदंश की अधिकतर घटनाएं रात मेंं होती हैं। 

जहरीले सर्पदंश के प्रारम्भिक लक्षण -

इसके कोई निर्धारित लक्षण नहीं होतेे लेकिन निम्‍नलिखित लक्षण सर्पदंश से 15 मिनट से 10 घंटे बाद तक ही अवधि में दिखाई दे सकते हैं। लक्षणों की तीव्रता काटने वाले सांप की प्रजाति तथा रोगी और काटने वाले सांप की शारीरिक क्रियात्‍मकता पर निर्भर करती हैं। 

  • कांटने  के स्‍थान पर लालिमा तथा सूजन
  • कांटने के स्‍थान पर तेज दर्द
  • उनींदापन, जी मिचलाना तथा उल्‍टी होना।
  • सांस लेने में कठिनाई (गम्‍भीर मामलों में सांस पूरी तरह रूक सकती हैं)।
  • देखने में कठिनाई - धुंधला दिखना
  • मुंह से लार निकलना तथा अधिक पसीना आना। 
  • चेहरे, होंठ, जीभ, गले का मांसपेशियों में लकवे के कारण अस्‍पष्‍ट आवाज, बोझिल आंखें तथा निगलने में कठिनाई। 
  • मांसपेेेशियों में कमजोरी। 
  • हाेंठ तथा जीभ का नीला पड़ जाना। 
सांप काटने पर क्‍या करें - 

सांप द्वारा काटे जाने पर या किसी को सांप द्वारा काटते देख कभी भी हड़बड़ाना नहीं चाहिए। याद रखिये यह आवश्‍यक नहीं कि सर्पदंश होने के बाद होने वाली मौत सर्पदंश के कारण ही हुई हो। विषराेधक औषधि (प्रतिदंश विष) का प्रयोग केवल अस्‍पताल में या चिकित्‍सा केंद्र में योग्‍य चिकित्‍सकों की देखरेख में ही होना चाहिए। ताकि यदि रोगी में प्रत्‍यूर्जक (एलर्जिक) क्रिया हो तो उसे संभला जा सके। 

  • पीडि़त व्‍यक्ति को तुरंत अस्‍पताल पहुुँचायें।
  • पीडि़त व्‍यक्ति को सीधा लिटा दें और शान्‍त रखें। 
  • यह देंखे कि क्‍या काटने के स्‍थान पर विषदन्‍त के दो गहरे निशान है। दो गहरे निशानों के साथ छोटे-छोटे कई और निशान भी हो सकते हैं।
  • यदि काटने के स्‍थान पर बहुत से छोटे-छोटे चिन्‍ह उल्‍टे 'U ' के आकार में है तो यह दंश एक विषहीन सांप का हो सकता है। घाव को साफ करेंं और मरीज को अस्‍पताल पहुँचाये। टिटेनसरोधी टीके की आवश्‍यकता मरीज को हो सकती है। 
  • मरीज की अंगूठी, कंगन, पायल तथा जूते उतार दें क्‍योंकि हाथ-पैरों में सूजन आने पर इन हिस्‍सों में रक्‍त प्रवाह रूक सकता है। 
  • जिस हाथ या पैर में सांप ने काटा हैं, उसमें लकड़ी की एक खपच्‍ची बांध दे ताकि मरीज उस भाग को मोड़ न सके।
  • यदि मरीज बेहोश है तो हर 10 मिनिट में उसकी सांस देखते रहें और उसे गर्म रखें।
सांप काटने पर क्‍या न करें -
  • सांप को पकड़ने की कोशिश न करें क्‍योंकि इससे सर्पदंश के शिकार व्‍यक्तियों की संख्‍या बढ़ सकती है।
  • झाड़फूंक और देशी इलाज में समय बर्बाद न करें। सर्पदंश के मामलों में समय बहत महत्‍वपूर्ण है।
  • डर तथा घबराहट के कारण मरीज को छटपटाने न दें।
  • दर्द से राहत के लिए एस्प्रिन ने दें।
  • जहर को चूस कर निकालने का प्रयास न करें। ऐसा करने पर यदि आपके मुंह में घाव या अल्‍सर है तो जहर आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है और वहां एक नहीं, दो मरीज हो जायेंगे। 
  • घाव को चाकू से नही खाेलें।
  • धमनीय रक्‍तबन्‍ध पर या घाव के ऊपर बहुत कस कर पट्टटी न बांधें।
  • रोगी को  मदिरा या कॉफी तथा चाय न पीने दें।
सर्पदंश के सभी रोगियों को अस्‍पताल पहुंचाया जाना चहिये। यदि संभव हो तो चिकित्‍सक को काटने वाले सांप का विवरण बताना चाहिए, जिससे उसे प्रतिदंश विष (विषरोधक औषधि) का चयन करनें में आसानी हो।


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