शिक्षा और प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर एक मनुष्य एक दलित वर्ग से उठकर राष्ट्रनिर्माताओं की पंक्ति में खड़ा हो सकता हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर हैं। भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को एक गरीब और दलित परिवार में हुआ था। जिसे लोग बेहद अछूत और निचला वर्ग मानते थे।
बचपन में भीमराव अंवेडकर के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था। भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजीसतपाल था। बाद मेंं अपने शिक्षक महादेव अंबेडकर के कहने पर उन्होंने अपने नाम के पीछे से सतपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ दिया। जो उनके गांव के नाम आंबडवे पर आधारित था।
अपने विवादस्पद विचारों, गांधीजी, और कांग्रेस की कटु आलोचना के बावजूद अंबेडकर की प्रतिष्ठा पूरे देश में एक अदिृतीय विद्वान और कानून के ज्ञाता की थी। जिसके कारण स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार ने अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया। जिसे उन्होंने सहज स्वीकार कर लिया।
29 अगस्त 1947 को अंबेडकर को संविधान की रचना के लिए बनी संविधान महासभा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। और फिर 26 नबंवर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया। डॉ भीमराव अंबेडकर ने न सिर्फ देश का संविधान बनाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि एक इकोनोमिस्ट के तौर पर भी उन्होंने देश के निर्माण में भी बड़ा योगदान दिया।
उन्होंने दलितों से सामाजिक भेदभाव के विरूद्ध जीवन भर अभियान चलाया। साथ ही श्रमिकों, किसानों, और महिलाओं के अधिकारों का भी वेजोड़ समर्थन किया। डॉ भीमराव अंबेडकर का पूरा जीवन हर किसी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं।
आज की इस पोस्ट में बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के कुछ अनमोल विचारों के बारे में पढि़ए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
राजनीति में हिस्सा ना लेने का सबसे बड़ा दंड यह है कि अयोग्य व्यक्ति आप पर शासन करने लगता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
छीनेे हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करना होता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
भाग्य में नहीं अपनी शक्ति में विश्वास रखों। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
हो सकता है कि समानता एक कल्पना हो पर विकास के लिए यह जरूरी है। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
आप स्वाद को बदल सकते है पर जहर को अमृत में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
अच्छा दिखने के लिए नहीं बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाई-चारा सिखाये। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
मेरी प्रशंसा और जय जय कार करने से अच्छा है मेरेे दिखाये गए मार्ग पर चलो। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
एक महान व्यक्ति, एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से अलग है क्योंकि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
यदि आप मन से स्वतंत्र हैं तभी आप वास्तव में स्वतंत्र हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
इस पूरी दुनिया में गरीब वही है, जो शिक्षित नहीं है। इसलिए आधी रोटी खा लेना, लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाना। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
शिक्षा वो शेरनी है जो इसका दूध पिएगा वो दहाड़ेगा। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
मैं एक समुदाय की प्रगति को उस प्रगति की डिग्री से मापता हूँ, जो महिलाओं ने हासिल की हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
ज्ञानी लोग किताबों की पूजा करते हैं जबकि अज्ञानी लोग पत्थरों की पूजा करते हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
महान प्रयासों को छोड़कर, इस दुनिया में कुछ भी बहुमूल्य नहीं हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जातिविहीन करना होगा। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक माध्यम हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
मंदिर जाने वाले लोगों की लंबी कतारें, जिस दिन पुस्तकालय की ओर बढ़ेगी। उस दिन मेरे इस देश को महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
पानी की बूंद जब सागर में मिलती है, तो अपनी पहचान खो देती है। इसके विपरीत व्यक्ति समाज में रहता है, पर अपनी पहचान नहीं खोता। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए पैदा नहीं हुआ, बल्कि स्वयं के विकास के लिए भी पैदा हुआ हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, वह कौम कभी अपना इतिहास नहीं बना सकती। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
शिक्षा महिलाओं के लिए भी उतनी ही जरूरी है जितनी पुरूषों के लिए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
देश के विकास से पहले हमें अपनी बुद्धि के विकास की आवश्यकता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
अन्याय से लड़ते हुए आपकी मौत हो जाती है, तो आपकी आने वाली पीढि़या उसका बदला जरूर लेंगी। और अगर अन्याय सहते हुए आपकी मौत हो जाती है तो आपकी आने वाली पीढि़यां भी गुलाम बनी रहेंगी। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
एक संविधान चाहे जितना बुरा हो, वह अच्छा साबित हो सकता है यदि उसका पालन करने वाले लोग अच्छे हों। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
शिक्षित बनो, संगठित रहो, और संघर्ष करो। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
एक विचार को प्रसार की उतनी ही आवश्यकता होती है, जितना कि एक पौधे को पानी की। नहीं तो दोनों मुरझाएंगे और मर जायेंगे। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
यदि हम आधुनिक विकसित भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों को एक होना पड़ेगा। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना की काफी नहीं हैं बल्कि इसके लिए न्याय, राजनीतिक, और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था का होना भी बहत आवश्यक हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जिसे अपने दुखों से मुक्ति चाहिए, उसे लड़ना होगा। और जिसे लड़ना है उसे पहले पढ़ना होगा। क्योंकि ज्ञान के बिना लड़ने गए तो हार निश्चित हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जो धर्म जन्म से एक को श्रेष्ठ, और दूसरे को नीच बताते हैं। धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
पति पत्नी के बीच का सम्बन्ध घनिष्ठ मित्रों के सम्बन्ध के समान होना चाहिए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
हमारे देश के संविधान में मतदान का अधिकार एक ऐसी ताकत है जो किसी ब्रह्राास्त्र से कहीं अधिक ताकत रखता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
बुद्धि का विकास मानव के विकास का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
कुछ लोग सोचते हैं, कि धर्म समाज के लिए आवश्यक नहीं हैं। मैं यह दृष्टिकोण नहीं रखता, मैं धर्म की नींव को समाज के जीवन और प्रथाओं के लिए आवश्यक मानता हूं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जो झुक सकता है वो झुका भी सकता हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
जीवन लम्बा नहीं, बल्कि महान होना चाहिए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
एक सुरक्षित सेना, एक सुरक्षित सीमा से बेहतर हैं। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
धर्म मनुष्य के लिए बना है न कि मनुष्य धर्म के लिए। - बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
0 Comments
Post a Comment