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| Sadguru |
पर जीवन इस बात के प्रति सचेतन हैं कि ये कभी-कभी गलत चुनाव कर सकता हैं। तो यही कारण हैं कि गर्भ अवस्था के दौरान एक गर्भवती महिला के आस-पास एक अलग तरह का वातावरण बनाने के लिए बहुत सी सावधानियां बरती जाती थीं। अब हम ये सब छोड़ रहे हैं। आज गर्भवतीं महिलाएं काम पर जाती हैं सिनेमा देखने जाती हैं। वे सभी जगह जाती हैं ऐसी चीजें अब नहीं की जाती हैं। ये सिर्फ इस उम्मीद से किया जाता था कि आप दोनो से बेहतर प्राणी आपके गर्भ में आए।
आप जानते हैं कि मैं क्या कह रहा हूं। आप पति-पत्नी हैं आपके कुछ खास गुण हैं आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी तरह नहीं बल्कि आपसे ऊंची गुणवत्ता का हों। आपसे बेहतर प्राणी आपके गर्भ में आना चाहिए। उस वजह से गर्भवस्था के एक खास चरण के बाद एक पति को भी उस महिला को देखने की भी अनुमति नहीं थीं। क्योंकि उसे आराम और खुशहाली की एक खास अवस्था में रखना होता था। एक खास तरह के विचारों के साथ एक खास तरह के वातावरण में हर तरह से उसके सिस्टम को खुश रखने की कोशिश होती थीं। सही तरह की सुगंध, ध्वनियां, मंत्र, भोजन हर चीज ताकी उसका शरीर ऐसी अवस्था में हो जिससे सही किस्म के प्राणी को निमंत्रण दें।
शायद आज की दुनियां में इन सब चीजों का सवाल ही नहीं उठता। अगर कोई प्राणी इस खास शरीर में प्रवेश करता हैं और उसके शिशु बनने के दौरान उसे उपर्युक्त नहीं पाता तो वो चला जाता हैं। इसलिए एक द्वार खुला रखा जाता हैं। तो ये ब्रम्ह्रारंध्र हैं। और एक दिन जब आप शरीर छोड़ते है तो उस समय भी आप किसी मार्ग से जा सकते हैं मगर आप ब्रम्हरंध्र से जाते हैं तो ये जाने का सबसे अच्छा तरीका हैं। अगर आप सचेतन रूप से शरीर के किसी भी हिस्से जातें हैं तो ये ठीक हैं। लेकिन अगर आप बम्ह्रारंध्र से जा पाएं तो ये प्रस्थान करने का सबसे अच्छा तरीका हैं। तो चूंकि इस बारे में बहुत सी बाते होती हैंं, तो इस बारे में किताबें लिखी गईं हैं।
एक बात ये है कि इसकी काफी संभावना हैं कि हो सकता हैं कि कोई इंसान अपने सिर के ऊपर या माथे के बीच में चीजों की कल्पना करना शुरू कर दें। वे कई चीजों की कल्पना करते रहतें हैं। आपको ये समझने की जरूरत हैं कि आप जहां भी अपने मन को केंन्द्रित करतें हैं। वहां कुछ हलचल होगी। अगर आप चाहे तो अभी आजमा सकते हैं। आप अपनी हथेली की सबसे छोटी ऊंगली को सीधा रखें और इसके नोंक पर ध्यान केंन्द्रित करें। आप देखेंगे की 1 मिनिट के भीतर वहां कुछ हलचल होगी। शरीर के किसी भी हिस्से पर अगर आप ध्यान केंन्द्रित करते हैं तो वहां आप कुछ हलचल महसूस करेंगे।
तो इसे आपके अंदर हो रही महान प्रक्रिया के रूप में महान नहीं समझाना चाहिए। बेशक थोड़ी शारीरिक हलचल यहां वहां होती रहती हैं। कभी-कभी ऐसा आपके साथ होता रहता हैं आप सो रहे होते हैं। शरीर का कोई हिस्सा थोड़ा सा हिलता ढुलता हैं या ये और वो। खासकर अगर आप बहुत नर्वस हो तो ऐसा आपके साथ अक्सर हो सकता हैं। अगर आप सहज हैं तो शायद ऐसा न होंं। मगर आप थोड़े तनाव या दबाव में हैं तो येे आपके विभिन्न अंगों में हो सकता हैं। तो उसे भी गलत लेने की जरूरत नहीं हैं। मुझे नहीं पता की मुझे ये कहना चाहिए या नहीं, क्योंकि अगर में येे कहता हूं तो आप हर तरह की चीजों की कल्पना करना शुरू कर दें। अगर आप ध्यानमय हो जाते हैं जो कि आप बन रहे हैं। जब साम्भवी करते हैं-
मुझे ये नहीं कहना चाहिए। ये हर तरह की चीजों को जन्म देगा। क्योंकि लोगो की कल्पना बहुत प्रचंड होती है। मैं हमेशा ऐसी कुछ भी बताने से बचता हूं जो उनके अनुभव नहीं हैं। क्योंकि हर तरह की चीजों की कल्पना करना शुरू कर देंगे। वैसे भी, अगर आप खुद केे साथ ऐसा मत कीजिए। ये जरूरी नहीं हैं। अगर में अपना हाथ अपने ब्रम्ह्रारंध्र के ऊपर रखता हूं। यहां तक 4 फीट ऊपर तक भी अगर आप इस ऊपर रखते हैं। तो आप अपने हाथ में एक स्पष्ट भाव महसूस करेंगे जे जो हमेशा एक आठ के आकार में होगा। अगर आप अपनी ऊर्जाओं को एक खास तरीके से रखते हैं। तो ऐसा हमेशा होगा। ऐसा ये हर इंसान के साथ हो सकता हैं। लेकिन ये भीतर होता हैं ये शरीर से आगे नहीं बढ़ता।
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